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अध्ययन लेख 29

क्या आप महा-संकट के लिए तैयार हैं?

क्या आप महा-संकट के लिए तैयार हैं?

“तैयार रहो।”​—मत्ती 24:44.

गीत 150 हिफाज़त के लिए यहोवा की खोज करें

एक झलक a

1. किसी विपत्ति के लिए पहले से तैयारी करने में क्यों भलाई है?

 तैयारी करने से जान बच सकती है। जैसे, किसी विपत्ति का सामना करने के लिए जिन लोगों ने पहले से तैयारी की होती है, उनके बचने की गुंजाइश ज़्यादा होती है और वे दूसरों की मदद भी कर पाते हैं। ज़रूरतमंदों की मदद करनेवाले यूरोप के एक संगठन ने कहा, “आपकी जान बच पाएगी या नहीं, यह काफी हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि आपने पहले से कितनी अच्छी तैयारी की है।”

2. हमें महा-संकट के लिए पहले से तैयारी क्यों करनी चाहिए? (मत्ती 24:44)

2 महा-संकट अचानक शुरू हो जाएगा। (मत्ती 24:21) लेकिन जब यह आएगा, तब हर कोई हैरान नहीं होगा, जैसे दूसरी विपत्तियों के दौरान होता है। वह इसलिए कि इसके बारे में यीशु ने पहले ही बता दिया था। करीब 2,000 साल पहले उसने अपने चेलों से कहा था कि वे इस दिन के लिए तैयार रहें। (मत्ती 24:44 पढ़िए।) अगर हम पहले से तैयार होंगे, तो उस मुश्‍किल वक्‍त का सामना करना हमारे लिए थोड़ा आसान हो जाएगा और हम दूसरों की भी मदद कर पाएँगे।​—लूका 21:36.

3. धीरज रखने और करुणा और प्यार होने से हम महा-संकट का सामना करने के लिए कैसे तैयार हो पाएँगे?

3 आइए ऐसे तीन गुणों पर ध्यान दें जिन्हें बढ़ाने से हम महा-संकट का सामना करने के लिए तैयार हो पाएँगे। आगे चलकर अगर हमसे न्याय का कड़ा संदेश सुनाने के लिए कहा जाए और लोग हमारा विरोध करें, तो हम क्या करेंगे? (प्रका. 16:21) अगर हममें धीरज होगा, तो हम यहोवा की आज्ञा मानेंगे और भरोसा रखेंगे कि वह हमें बचाएगा। एक और बात, अगर हमारे भाई-बहनों को बहुत कम में गुज़ारा करना पड़े या उनके पास कुछ भी ना रह जाए, तब हम क्या करेंगे? (हब. 3:17, 18) अगर हमारे दिल में उनके लिए करुणा होगी, तो उनकी मदद करने के लिए हमसे जो बन पड़ेगा, हम करेंगे। और जब राष्ट्रों का गठबंधन हम पर हमला करेगा, उस दौरान अगर हमें कुछ समय के लिए बहुत-से भाई बहनों के साथ रहना पड़े, तब हम क्या करेंगे? (यहे. 38:10-12) अगर हमारे दिल में उनके लिए गहरा प्यार होगा, तो हम उस मुश्‍किल वक्‍त को पार कर पाएँगे।

4. बाइबल में कैसे यह बढ़ावा दिया गया है कि हम धीरज रखें और अपने दिल में दूसरों के लिए करुणा और प्यार बढ़ाते रहें?

4 परमेश्‍वर के वचन में हमें बढ़ावा दिया गया है कि हम धीरज रखें और अपने दिल में दूसरों के लिए करुणा और प्यार बढ़ाते रहें। जैसे लूका 21:19 में लिखा है, “तुम धीरज धरने की वजह से अपनी जान बचा पाओगे।” कुलुस्सियों 3:12 में लिखा है, “करुणा . . . का पहनावा पहन लो।” और 1 थिस्सलुनीकियों 4:9, 10 में लिखा है, “तुम्हें खुद परमेश्‍वर ने एक-दूसरे से प्यार करना सिखाया है। . . . मगर भाइयो, हम तुम्हें बढ़ावा देते हैं कि तुम और भी ज़्यादा ऐसा करते रहो।” इन आयतों में लिखी बातें उन मसीहियों से कही गयी थीं जो पहले से ही धीरज धर रहे थे और जिनके दिल में दूसरों के लिए करुणा और प्यार था। लेकिन उन्हें ये गुण अपने अंदर बढ़ाते रहने थे। हमें भी ऐसा ही करना है। तो आइए गौर करें कि पहली सदी के मसीहियों ने ये तीनों गुण कैसे ज़ाहिर किए। फिर हम जानेंगे कि हम उनकी तरह कैसे बन सकते हैं। इस तरह हम महा-संकट के लिए तैयार हो पाएँगे।

धीरज धरने का इरादा पक्का कीजिए

5. पहली सदी के मसीहियों ने किस तरह धीरज धरा?

5 पहली सदी के मसीहियों को धीरज धरने की ज़रूरत थी। (इब्रा. 10:36) उन्हें उन समस्याओं का तो सामना करना ही पड़ा जिनका बाकी लोग करते थे, पर उन पर और भी मुश्‍किलें आयीं। कई मसीही यहूदी धर्म गुरुओं और रोमी अधिकारियों के हाथों भी ज़ुल्म सह रहे थे और उनके परिवारवाले भी उनके दुश्‍मन बन गए थे। (मत्ती 10:21) और मंडली में भी कई बार उन्हें ऐसे लोगों का सामना करना पड़ा जो मसीही शिक्षाओं के खिलाफ बातें सिखा रहे थे, जिनसे मंडली में फूट पड़ सकती थी। (प्रेषि. 20:29, 30) फिर भी उन मसीहियों ने धीरज धरा। (प्रका. 2:3) वे यह कैसे कर पाए? उन्होंने शास्त्र में दिए उन लोगों के उदाहरणों पर गौर किया जिन्होंने धीरज रखा था, जैसे अय्यूब। (याकू. 5:10, 11) उन्होंने यहोवा से हिम्मत के लिए प्रार्थना भी की। (प्रेषि. 4:29-31) और उन्होंने इस बात पर भी ध्यान दिया कि अगर वे धीरज धरेंगे, तो यहोवा उन्हें ज़रूर इनाम देगा।​—प्रेषि. 5:41.

6. बहन मेरीटा ने विरोध का सामना करने के लिए जो किया, उससे आपने क्या सीखा?

6 आज अगर हम बाइबल में और हमारे प्रकाशनों में दिए उदाहरण लगातार पढ़ें और उन पर मनन करें, तो हम भी धीरज धर पाएँगे। अल्बानिया में रहनेवाली बहन मेरीटा ऐसा ही करने से धीरज धर पायीं। उनके परिवारवाले उनका बहुत विरोध करते थे और उन्हें मारते-पीटते थे। उन्होंने कहा, “मैंने बाइबल में अय्यूब का किस्सा पढ़ा और उस पर मनन किया। उसकी कहानी मेरे दिल को छू गयी। उसे कितना कुछ सहना पड़ा! और वह यह भी नहीं जानता था कि कौन उस पर मुसीबतें ला रहा है। फिर भी उसने कहा, ‘मैं मरते दम तक निर्दोष बना रहूँगा।’ (अय्यू. 27:5) अय्यूब ने जो कुछ सहा उसके मुकाबले मेरी परेशानियाँ तो कुछ भी नहीं, मैं कम-से-कम यह तो जानती हूँ कि मेरी परीक्षाओं के पीछे किसका हाथ है।”

7. भले ही आज आप किसी बड़ी मुश्‍किल का सामना ना कर रहे हों, फिर भी आप क्या कर सकते हैं?

7 धीरज धरने के लिए यह भी ज़रूरी है कि हम लगातार यहोवा से प्रार्थना करें और उसे अपनी हर चिंता-परेशानी बताएँ। (फिलि. 4:6; 1 थिस्स. 5:17) हो सकता है, फिलहाल आप किसी बड़ी मुश्‍किल का सामना ना कर रहे हों। लेकिन जब आप परेशान होते हैं या आपको समझ में नहीं आता कि क्या करें, क्या तब भी आप यहोवा से कहते हैं कि वह आपको राह दिखाए? अगर आज आप हर दिन की छोटी-छोटी बातों के लिए यहोवा से मदद माँगें, तो आगे चलकर जब आपके सामने बड़ी-बड़ी मुश्‍किलें आएँगी, तब आप यहोवा से मदद माँगने से झिझकेंगे नहीं। और आपको इस बात का यकीन होगा कि वह जानता है कि ठीक कब और कैसे आपकी मदद करनी है।​—भज. 27:1, 3.

धीरज

जब हम किसी मुश्‍किल में धीरज धरते हैं, तो हम अगली मुश्‍किल का सामना करने के लिए तैयार हो पाते हैं (पैराग्राफ 8)

8. बहन मीरा के उदाहरण से कैसे पता चलता है कि आज मुश्‍किलों में धीरज रखने से हम आगे भी धीरज रख पाएँगे? (याकूब 1:2-4) (तसवीर भी देखें।)

8 आज अगर हम मुश्‍किलों के दौरान धीरज रखें, तो मुमकिन है कि भविष्य में हम महा-संकट के दौरान भी धीरज रख पाएँगे। (रोमि. 5:3) यह हम क्यों कह सकते हैं? कई भाई-बहनों ने देखा है कि जब किसी मुश्‍किल में उन्होंने धीरज रखा और वे यहोवा के वफादार रहे, तो इससे उन्हें आगे आनेवाली मुश्‍किलों का सामना करने में मदद मिली। इस तरह धीरज रखने से उनका यह विश्‍वास और भी बढ़ गया कि यहोवा उनकी मदद करने के लिए तैयार है। और यह विश्‍वास होने से वे अगली परीक्षा के दौरान धीरज रख पाए। (याकूब 1:2-4 पढ़िए।) ज़रा अल्बानिया में रहनेवाली बहन मीरा के उदाहरण पर ध्यान दीजिए जो एक पायनियर हैं। उन्होंने भी देखा है कि बीते समय में उन्होंने मुश्‍किलों के दौरान जिस तरह धीरज धरा, उस वजह से वे आज भी धीरज धर पा रही हैं। कई बार बहन मीरा को लगता है कि उन्हीं की ज़िंदगी में इतनी सारी मुश्‍किलें हैं। लेकिन फिर वे सोचती हैं कि पिछले 20 सालों के दौरान यहोवा ने कितनी बार उन्हें सँभाला है। और वे खुद से कहती हैं, “यहोवा की वफादार बनी रह। इतने सालों तक यहोवा ने तेरा साथ दिया है। सोच तूने अब तक कितनी सारी मुश्‍किलें पार की हैं, क्या वह सारी मेहनत यूँ ही बेकार जाने देगी? अब हिम्मत मत हार।” आप भी सोच सकते हैं कि अब तक मुश्‍किलों के दौरान धीरज धरने में कैसे यहोवा ने आपकी मदद की है। यकीन मानिए, जब भी किसी मुश्‍किल के दौरान आप धीरज धरते हैं, तो यहोवा उस पर ध्यान देता है और वह इसके लिए आपको इनाम देगा। (मत्ती 5:10-12) इस तरह जब आप आज धीरज धरना सीखेंगे, तो आप महा-संकट के दौरान मुश्‍किलों का डटकर सामना करने के लिए तैयार हो पाएँगे।

करुणा से भरकर भाई-बहनों की मदद करते रहिए

9. सीरिया की अंताकिया मंडली के भाई-बहनों ने कैसे दिखाया कि उनके दिल में करुणा है?

9 ध्यान दीजिए कि जब एक बार यहूदिया में भारी अकाल पड़ा तब क्या हुआ। जब सीरिया की अंताकिया मंडली के भाई-बहनों ने इस बारे में सुना, तो ज़रूर उन्हें यहूदिया के भाई-बहनों पर तरस आया होगा और उनका दिल करुणा से भर गया होगा। पर इतना ही नहीं, उन्होंने उनकी मदद करने के लिए कदम भी उठाया। बाइबल में लिखा है, “अंताकिया के चेलों ने ठान लिया कि हरेक से जितना बन पड़ेगा, उतना वे यहूदिया के भाइयों की मदद के लिए राहत का सामान भेजेंगे।” (प्रेषि. 11:27-30) वैसे तो वे यहूदिया के भाइयों से बहुत दूर थे, फिर भी वे उनकी मदद करने से पीछे नहीं हटे।​—1 यूह. 3:17, 18.

करुणा

अगर हमारे दिल में भाई-बहनों के लिए करुणा हो, तो प्राकृतिक विपत्तियाँ आने पर हम उनकी मदद करेंगे (पैराग्राफ 10)

10. जब कोई विपत्ति आती है, तो हम किन तरीकों से दिखा सकते हैं कि हमारे दिल में भाई-बहनों के लिए करुणा है? (तसवीर भी देखें।)

10 आज जब कोई प्राकृतिक विपत्ति आती है, तो हम कैसे दिखा सकते हैं कि हमारे दिल में भाई-बहनों के लिए करुणा है? हम उनकी मदद करने के लिए फौरन कदम उठा सकते हैं। हम किसी काम में हाथ बँटाने के लिए प्राचीनों से बात कर सकते हैं, पूरी दुनिया में होनेवाले काम के लिए दान कर सकते हैं या वहाँ के भाई-बहनों के लिए प्रार्थना कर सकते हैं। b (नीति. 17:17) उदाहरण के लिए, जब 2020 में कोविड-19 महामारी फैली हुई थी, तो भाई-बहनों की देखभाल करने के लिए पूरी दुनिया में 950 से भी ज़्यादा विपत्ति राहत-समितियाँ बनायी गयीं। जो भाई-बहन राहत काम में हाथ बँटाते हैं, वे सच में तारीफ के काबिल हैं। उनके दिल में भाई-बहनों के लिए बहुत करुणा है, इसलिए उन्होंने राहत का सामान पहुँचाया और यहोवा की सेवा करते रहने में उनकी मदद की। और कई इलाकों में तो भाई-बहनों के घर या उपासना की जगहों की मरम्मत भी की या उन्हें दोबारा बनाया।​—2 कुरिंथियों 8:1-4 से तुलना करें।

11. करुणा की वजह से जब हम भाई-बहनों की मदद करते हैं, तो उससे कैसे यहोवा की महिमा होती है?

11 कोई विपत्ति आने पर जब हम करुणा से भरकर भाई-बहनों के लिए अपनी तरफ से कुछ करते हैं, तो लोग इस पर ध्यान देते हैं। उदाहरण के लिए, 2019 में डोरियन नाम का जब एक तूफान आया, तो बहामास में हमारा एक राज-घर तहस-नहस हो गया। हमारे भाई-बहन जब उस राज-घर को दोबारा बना रहे थे, तब उन्होंने एक ठेकेदार से पूछा कि वह कुछ काम करने के लिए कितने पैसे लेगा। उसने उनसे कहा, ‘मैं आपका यह काम मुफ्त में करूँगा। मैं औज़ार भी दूँगा, सामान भी लाऊँगा और मज़दूरी का भी पैसा नहीं लूँगा। मैं बस आपके संगठन के लिए यह करना चाहता हूँ। आप अपने दोस्तों की जिस तरह मदद कर रहे हैं, वह मुझे बहुत अच्छा लगा।’ आज दुनिया में ज़्यादातर लोग यहोवा को नहीं जानते, पर उनमें से कई यहोवा के साक्षियों के व्यवहार पर ज़रूर ध्यान देते हैं। सोचिए, यह कितनी बड़ी बात है कि हम करुणा से भरकर जो काम करते हैं, उन्हें देखकर लोगों के मन में सच्चे परमेश्‍वर को जानने की इच्छा जाग सकती है, जो “दया का धनी है।”​—इफि. 2:4.

12. आज अगर हमारे दिल में भाई-बहनों के लिए करुणा होगी, तो इससे हम महा-संकट के लिए कैसे तैयार हो पाएँगे? (प्रकाशितवाक्य 13:16, 17)

12 महा-संकट के दौरान भी हमें अपने कामों से यह ज़ाहिर करना होगा कि हमारे दिल में भाई-बहनों के लिए करुणा है। ऐसा क्यों? बाइबल से पता चलता है कि जो लोग दुनिया की सरकारों का साथ नहीं देते, उन्हें आज भी मुश्‍किलों का सामना करना पड़ता है और महा-संकट के दौरान भी करना पड़ेगा। (प्रकाशितवाक्य 13:16, 17 पढ़िए।) हो सकता है, उस वक्‍त हमारे कुछ भाई-बहनों के पास खाने-पीने की चीज़ें ना हों या सिर छिपाने की जगह ना हो। ऐसे में जब हम करुणा से भरकर अपने भाई-बहनों की मदद करेंगे, तो हमारा राजा यीशु मसीह जब न्याय करने आएगा, तो वह हमसे कहेगा, “आओ, राज के वारिस बन जाओ।”​—मत्ती 25:34-40.

भाई-बहनों के लिए प्यार बढ़ाते रहिए

13. जैसे रोमियों 15:7 में बढ़ावा दिया गया है, पहली सदी के मसीहियों ने अपने बीच प्यार का बंधन कैसे मज़बूत किया?

13 पहली सदी में हर कोई यह साफ देख सकता था कि मसीहियों के बीच कितना प्यार है। लेकिन क्या भाई-बहनों के लिए एक-दूसरे से प्यार करना आसान रहा होगा? ज़रा रोम की मंडली के भाई-बहनों के बारे में सोचिए। वहाँ कुछ भाई-बहन यहूदी थे और उन्हें बचपन से मूसा का कानून मानना सिखाया गया था। लेकिन कुछ भाई-बहन गैर-यहूदी थे और बिलकुल अलग माहौल में पले-बढ़े थे। कुछ मसीही गुलाम थे, तो कुछ आज़ाद। और कुछ तो ऐसे भी थे जिनके अपने गुलाम थे। वे भाई-बहन एक-दूसरे से बहुत अलग थे, फिर भी वे एक-दूसरे से प्यार करते थे। वे यह कैसे कर पाए? पौलुस ने उनसे गुज़ारिश की, “एक-दूसरे को अपना लो।” (रोमियों 15:7 और फुटनोट पढ़िए।) इसका क्या मतलब है? इस आयत में जिस शब्द का अनुवाद “अपना लो” या “स्वागत करो” किया गया है, उसका मतलब है किसी से प्यार से पेश आना या मेहमान-नवाज़ी करना, जैसे किसी को अपने घर बुलाना या उनके साथ दोस्ती करना। जैसे पौलुस ने फिलेमोन से कहा कि वह अपने दास उनेसिमुस का ‘प्यार से स्वागत’ करे जो उसके यहाँ से भाग गया था। (फिले. 17) प्रिस्किल्ला और अक्विला ने अपुल्लोस का स्वागत किया। वह मसीही शिक्षाओं के बारे में उनसे कम जानता था, फिर भी उन्होंने उससे दोस्ती की और ‘उसे अपने साथ ले लिया।’ (प्रेषि. 18:26) पहली सदी के मसीही अलग-अलग माहौल से थे और समाज में उनका ओहदा अलग-अलग था। पर इस वजह से उन्होंने अपने बीच दूरियाँ नहीं आने दीं, बल्कि एक-दूसरे का स्वागत किया।

प्यार

हमें सभी भाई-बहनों का प्यार चाहिए (पैराग्राफ 15)

14. बहन ऐना और उनके पति ने किस तरह भाई-बहनों के लिए अपना प्यार जताया?

14 हम भी अपने भाई-बहनों से दोस्ती करके और उनके साथ वक्‍त बिताकर, उनके लिए अपना प्यार जता सकते हैं। तब वे भी हमसे प्यार करेंगे। (2 कुरिं. 6:11-13) ज़रा बहन ऐना और उनके पति के उदाहरण पर ध्यान दीजिए। उन्हें पश्‍चिम अफ्रीका में मिशनरी सेवा करने के लिए भेजा गया था। उनके वहाँ पहुँचने के कुछ ही समय बाद कोविड-19 महामारी शुरू हो गयी। इस वजह से वे वहाँ की मंडली के भाई-बहनों से मिल नहीं पाए। तो फिर वे भाई-बहनों के लिए अपना प्यार कैसे जता पाए? उन्होंने वीडियो कॉल करके भाई-बहनों से बातचीत की और उन्हें बताया कि वे उन्हें और अच्छी तरह जानना चाहते हैं। उनका यह प्यार भाई-बहनों के दिल को छू गया। फिर वे भी उन्हें अकसर फोन करने लगे और उन्हें मैसेज भेजने लगे। इस पति-पत्नी ने भाई-बहनों से जान-पहचान बढ़ाने के लिए क्यों इतनी मेहनत की? बहन ऐना बताती हैं, “मेरे और मेरे परिवार का भाई-बहनों ने अच्छे और बुरे वक्‍त में जिस तरह साथ दिया, उनका वह प्यार मैं आज तक नहीं भूली हूँ। इस वजह से मेरा मन करता है कि मैं भी भाई-बहनों से वैसा ही प्यार करूँ।”

15. सभी भाई-बहनों से प्यार करने के बारे में आपने बहन वनेसा से क्या सीखा? (तसवीर भी देखें।)

15 कई मंडलियों में ऐसे भाई-बहन हैं जिनकी परवरिश अलग-अलग माहौल में हुई है और जिनका स्वभाव भी अलग-अलग है। अगर हम उनकी अच्छाइयों पर ध्यान दें, तो उनके लिए हमारा प्यार बढ़ सकता है। न्यूज़ीलैंड में सेवा कर रहीं बहन वनेसा के उदाहरण पर ध्यान दीजिए। उन्हें अपनी मंडली के कुछ भाई-बहनों के साथ दोस्ती करना बहुत मुश्‍किल लगता था। वह इसलिए कि उन भाई-बहनों का स्वभाव ऐसा था जिससे उन्हें चिढ़ होती थी। पर उन्होंने सोचा कि वे उन भाई-बहनों से दूर-दूर रहने के बजाय उनके साथ और वक्‍त बिताएँगी। ऐसा करने से वे जान पायीं कि उनमें ऐसी कौन-सी बात है जो यहोवा को बहुत पसंद है। वे कहती हैं, “अब मेरे पति एक सर्किट निगरान हैं और हम ऐसे बहुत-से भाई-बहनों से मिलते हैं जिनका स्वभाव हमसे बिलकुल अलग है। और मैं आसानी से उनसे घुल-मिल जाती हूँ। मुझे अलग-अलग भाई-बहनों से मिलना बहुत अच्छा लगता है। यहोवा भी अलग-अलग तरह के लोगों से बहुत प्यार करता है, तभी तो उसने सब किस्म के लोगों को अपनी तरफ खींचा है।” जब हम यहोवा की तरह भाई-बहनों में अच्छाइयाँ देखेंगे, तो हम दिखाएँगे कि हमें उनसे प्यार है।​—2 कुरिं. 8:24.

यहोवा ने वादा किया है कि अगर हम भाई-बहनों के साथ मिलकर उपासना करते रहें, तो महा-संकट के दौरान वह हमारी हिफाज़त करेगा (पैराग्राफ 16)

16. महा-संकट के दौरान भाई-बहनों से प्यार करना क्यों बहुत ज़रूरी होगा? (तसवीर भी देखें।)

16 महा-संकट के दौरान भी हमें भाई-बहनों से प्यार करना होगा। जब महा-संकट शुरू होगा, तो यहोवा किस तरह हमारी हिफाज़त करेगा? ध्यान दीजिए कि पुराने ज़माने में जब बैबिलोन पर हमला किया गया, तब यहोवा ने अपने लोगों को क्या हिदायत दी। उसने उनसे कहा, “हे मेरे लोगो, अपने-अपने अंदरवाले कमरे में जाओ और दरवाज़ा बंद कर लो। थोड़ी देर के लिए छिप जाओ, जब तक कि मेरी जलजलाहट शांत नहीं हो जाती।” (यशा. 26:20) महा-संकट के दौरान भी शायद यहोवा के लोगों को कुछ ऐसा ही करना पड़े। ‘अंदरवाले कमरों’ का मतलब हमारी मंडलियाँ हो सकती हैं। यहोवा ने वादा किया है कि अगर हम अपने भाई-बहनों के साथ मिलकर उसकी उपासना करते रहें, तो महा-संकट के दौरान वह हमारी हिफाज़त करेगा। इसलिए यह बहुत ज़रूरी है कि आज हम अपने भाई-बहनों को सिर्फ बरदाश्‍त ना करें, बल्कि उनसे प्यार करें, भले ही यह मुश्‍किल क्यों ना हो। इससे आगे चलकर हमारी जान बच सकती है!

अभी से तैयारी कीजिए

17. अगर हम अभी से खुद को तैयार करें, तो महा-संकट के दौरान हम क्या कर पाएँगे?

17 जब “यहोवा का महान दिन” आएगा, तो सभी इंसानों के लिए वह बहुत मुश्‍किल दौर होगा। (सप. 1:14, 15) यहोवा के लोगों को भी मुश्‍किलों का सामना करना होगा। लेकिन अगर हम अभी से खुद को तैयार करें, तो हम उस वक्‍त शांत रह पाएँगे और दूसरों की मदद कर पाएँगे। हमारे सामने चाहे कैसी भी मुश्‍किल आए, हम धीरज धर पाएँगे। और जब हमारे भाई-बहन किसी मुश्‍किल से गुज़रेंगे, तो हमारे दिल में उनके लिए करुणा होगी। और उनकी मदद करने के लिए हमसे जो बन पड़ेगा, हम करेंगे। और आज अगर हम भाई-बहनों से प्यार करें, तो उस वक्‍त भी हम उनका साथ नहीं छोड़ेंगे। फिर यहोवा हमें नयी दुनिया में हमेशा की ज़िंदगी देगा, जहाँ हर तरह की विपत्तियाँ और मुश्‍किलें बीती बातें बनकर रह जाएँगी।​—यशा. 65:17.

गीत 144 रखो तुम इनाम पे नज़र!

a बहुत जल्द महा-संकट शुरू होनेवाला है। वह बहुत ही मुश्‍किल दौर होगा। उस वक्‍त ऐसी-ऐसी घटनाएँ घटेंगी जो अब तक नहीं घटीं। आज अगर हम धीरज रखें, भाई-बहनों से प्यार करें और उनके लिए हमारे दिल में करुणा हो, तो हम उस वक्‍त का सामना करने के लिए खुद को तैयार कर पाएँगे। गौर कीजिए कि पहली सदी के मसीहियों ने ये गुण कैसे ज़ाहिर किए, हम उनकी तरह कैसे बन सकते हैं और ये गुण ज़ाहिर करने से हम महा-संकट के लिए कैसे तैयार हो पाएँगे।

b जो भाई-बहन राहत काम में हाथ बँटाना चाहते हैं, उन्हें ‘स्थानीय योजना और निर्माण काम’ की अर्ज़ी (DC-50) या फिर ‘स्वयंसेवा कार्यक्रम’ की अर्ज़ी (A-19) भरनी चाहिए और फिर जब तक उन्हें बुलाया ना जाए, इंतज़ार करना चाहिए।