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शादी से पहले साथ रहने में क्या बुराई है?

शादी से पहले साथ रहने में क्या बुराई है?

बाइबल क्या कहती है?

शादी से पहले साथ रहने में क्या बुराई है?

क्या आप कपड़ा खरीदने से पहले यह देखने की कोशिश करते हैं कि वह आपको फिट होगा या नहीं? बेशक देखते होंगे। क्योंकि अगर बाद में वह छोटा-बड़ा निकला, तो आपको अफसोस होगा कि आपका समय भी बरबाद हुआ और पैसे भी गए।

बहुत-से लोग यही दलील शादी के लिए देते हैं। उनका मानना है कि कानूनी तौर पर पति-पत्नी बनने से पहले अच्छा होगा कि एक स्त्री और पुरुष साथ रहें। वे तर्क करते हैं, ‘अगर दोनों में बात नहीं बनी, तो वे एक-दूसरे से अलग हो सकते हैं। उन्हें तलाक लेने की चिंता नहीं करनी पड़ेगी, जो न सिर्फ पेचीदा होता है बल्कि महँगा भी।’

जो लोग ऐसा सोचते हैं, उन्होंने शायद अपने किसी शादीशुदा दोस्त को देखा हो, जिसका साथी उसे मारता-पीटता है और वह दोस्त जैसे-तैसे उस रिश्‍ते को निभा रहा है। या हो सकता है, उन्होंने ऐसे शादीशुदा जोड़ों को देखा हो जिनमें प्यार ही नहीं रहा। इसलिए उन्हें लगता है कि शादी से पहले साथ रहने में ही बुद्धिमानी है। इससे कम-से-कम आगे चलकर मुसीबतें तो नहीं झेलनी पड़ेंगी।

लेकिन इस बारे में बाइबल क्या कहती है? जवाब देने से पहले हमें यह जानना होगा कि परमेश्‍वर का वचन, शादी के बारे में क्या बताता है।

“एक ही तन”

शादी के इंतज़ाम की शुरूआत खुद यहोवा परमेश्‍वर ने की थी और उसे मंज़ूर भी किया था। इसलिए बाइबल हमें इस इंतज़ाम का आदर करने का बढ़ावा देती है। (उत्पत्ति 2:21-24) शुरू से ही यहोवा का यह मकसद रहा है कि शादी के ज़रिए एक स्त्री और पुरुष “एक ही तन” बन जाएँ। (उत्पत्ति 2:24) उत्पत्ति में दी इस आयत का हवाला देने के बाद यीशु ने कहा: “जिसे परमेश्‍वर ने एक बंधन में बाँधा है, उसे कोई इंसान अलग न करे।”—मत्ती 19:6.

यह सच है कि शादी के बाद कुछ लोग आगे चलकर तलाक ले लेते हैं। * लेकिन जब ऐसा होता है तो इसकी वजह यह नहीं कि शादी के इंतज़ाम में कोई खोट है। बल्कि इसकी वजह यह है कि किसी एक साथी ने या दोनों ने शादी की शपथ नहीं निभायी।

इसे समझने के लिए एक मिसाल लीजिए: एक स्त्री और पुरुष के पास एक गाड़ी है। लेकिन वे गाड़ी बनानेवाले की हिदायतों के मुताबिक गाड़ी का रख-रखाव नहीं करते। ऐसे में अगर गाड़ी खराब हो जाती है, तो इसके लिए कौन ज़िम्मेदार होगा? गाड़ी बनानेवाला या गाड़ी के मालिक जिन्होंने नियमित तौर पर गाड़ी की देखभाल नहीं की?

यही सिद्धांत शादी के मामले में भी लागू होता है। जब पति-पत्नी अपने रिश्‍ते को सँभाले रखते हैं और ठान लेते हैं कि समस्याएँ आने पर वे बाइबल के सिद्धांतों पर चलकर उनका हल निकालेंगे, तो तलाक की नौबत ही नहीं आएगी। शादी के वक्‍त पति-पत्नी एक-दूसरे का साथ निभाने का वादा करते हैं। इससे उन्हें भरोसा मिलता है कि उनका जीवन-साथी सुख-दुख में उनका साथ देगा। इस तरह शादी वह बुनियाद बन जाती है जिससे पति-पत्नी के रिश्‍ते में हमेशा प्यार बना रहता है।

“व्यभिचार से दूर रहो”

फिर भी, कुछ लोग शायद सोचें: ‘शादी से पहले साथ रहने में क्या बुराई है? क्या इस तरह अपने रिश्‍ते को परखने से हम शादी के पवित्र बंधन के लिए आदर नहीं दिखा रहे होंगे?’

बाइबल इसका जवाब साफ देती है। पौलुस ने लिखा: “व्यभिचार से दूर रहो।” (1 थिस्सलुनीकियों 4:3) शब्द “व्यभिचार” का मतलब है, सभी तरह के यौन-संबंध जो शादी से बाहर रखे जाते हैं। तो इसका मतलब है कि साथ रह रहे दो लोगों के बीच यौन-संबंधों को भी व्यभिचार कहा जाता है, फिर चाहे ये लोग शादी करने की क्यों न सोच रहे हों। इसलिए, बाइबल के मुताबिक शादी से पहले साथ रहना गलत है।

क्या बाइबल का यह नज़रिया दकियानूसी है? शायद कुछ लोगों को ऐसा लगे। क्योंकि आज कई देशों में एक स्त्री और पुरुष का साथ रहना गलत नहीं माना जाता, फिर चाहे वे बाद में शादी करें या न करें। लेकिन जो लोग शादी से पहले साथ रहे थे, ज़रा उनके बारे में गौर कीजिए: क्या उन्होंने परिवार में खुशी पाने का राज़ ढूँढ़ लिया है? क्या वे उन लोगों से ज़्यादा सुखी हैं जो शादी से पहले साथ नहीं रहे? क्या वे शादी के बाद अपने साथी के ज़्यादा वफादार हैं? जी नहीं, अध्ययन बताते हैं कि सच्चाई इसके बिलकुल उलट है। जो जोड़े शादी से पहले साथ रहते थे, उनकी शादीशुदा ज़िंदगी में ज़्यादा कलह होती है और आखिरकार उनका तलाक हो जाता है।

कुछ विशेषज्ञ शायद कहें कि ये अध्ययन गलत हैं। मिसाल के लिए, एक मनोवैज्ञानिक का कहना है कि ‘दो तरह के लोग होते हैं। एक, जो शादी से पहले साथ रहने का फैसला करते हैं और दूसरे जो शादी करके साथ रहते हैं।’ वह दावा करती है कि जो लोग तलाक लेते हैं, उसका दोष हम इस बात को नहीं दे सकते कि वे शादी से पहले साथ रहे थे। बल्कि इसकी वजह यह है कि उनमें “शादी के रिश्‍ते के लिए आदर ही नहीं रहा।”

अगर यह सच भी होता, तो भी इस बात को नकारा नहीं जा सकता कि शादी के बारे में परमेश्‍वर का नज़रिया रखना बेहद ज़रूरी है। बाइबल कहती है: “शादी सब लोगों के बीच आदर की बात हो।” (इब्रानियों 13:4) जब एक स्त्री-पुरुष एक ही तन बने रहने का वादा करते हैं और फिर शादी के इंतज़ाम के लिए आदर दिखाते हैं, तो उनके करीबी रिश्‍ते को आसानी से तोड़ा नहीं जा सकता।—सभोपदेशक 4:12.

एक बार फिर उस बात पर गौर कीजिए जो हमने शुरू में कही थी। बेशक, कपड़ा खरीदने से पहले उसे पहनकर देखना अक्लमंदी है, लेकिन इसकी तुलना शादी से पहले साथ रहने से नहीं की जा सकती। तो फिर किससे की जा सकती है? इससे कि आप जिस व्यक्‍ति को पसंद करते हैं, उससे तुरंत शादी नहीं करते। बल्कि उसे पहले अच्छी तरह जानने-समझने की कोशिश करते हैं कि वह आपके लिए सही जीवन-साथी होगा या नहीं। अकसर लोग इस बात को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। मगर शादीशुदा ज़िंदगी में कामयाब होने के लिए यह एक ज़रूरी कदम है। (g09 10)

[फुटनोट]

^ पैरा. 9 अगर एक पति या पत्नी शादी के बाहर यौन-संबंध रखता है, तो बाइबल उसके निर्दोष साथी को तलाक लेने और दोबारा शादी करने की इजाज़त देती है।—मत्ती 19:9.

क्या आपने कभी सोचा है?

◼ बाइबल यह क्यों कहती है कि यौन-संबंध सिर्फ पति-पत्नी तक ही सीमित होने चाहिए?—भजन 84:11; 1 कुरिंथियों 6:18.

◼ एक जीवन-साथी में आपको कौन-से गुण देखने चाहिए?—रूत 1:16, 17; नीतिवचन 31:10-31.

[पेज 29 पर बक्स]

“वह अपने ही शरीर के खिलाफ पाप कर रहा है”

बाइबल बताती है: “जो व्यभिचार में लगा रहता है वह अपने ही शरीर के खिलाफ पाप कर रहा है।” (1 कुरिंथियों 6:18) हाल के सालों में यह बात सच साबित हुई है। लाखों लोग एड्‌स और दूसरी लैंगिक बीमारियों की वजह से अपनी जान गँवा बैठे हैं। इतना ही नहीं, अध्ययन दिखाते हैं कि जो जवान, लैंगिक कामों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं, वे दूसरे जवानों से ज़्यादा निराशा के शिकार होते हैं और खुदकुशी करने की कोशिश करते हैं। बदचलनी में लगे रहने से नौजवानों में अनचाहा गर्भ ठहरता है और कुछ मामलों में वे अजन्मे बच्चे को गिरा देने के बारे में भी सोचते हैं। इन बातों को ध्यान में रखते हुए हम इस नतीजे पर पहुँच सकते हैं कि बाइबल में दिए नैतिक स्तर दकियानूसी बिलकुल नहीं हैं।